हिमाचल में घूमने वाली जगहें: एक ऐसी यात्रा जो सिर्फ देखी नहीं, महसूस की जाती है
कुछ जगहें ऐसी होती हैं जो सिर्फ देखी नहीं जातीं, बल्कि धीरे-धीरे आपके अंदर उतर जाती हैं। हिमाचल प्रदेश भी उन्हीं जगहों में से एक है। यहाँ की सड़कें आपको सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जातीं, बल्कि आपको रोज़मर्रा की भागदौड़ से बहुत दूर, एक ऐसी दुनिया में ले जाती हैं जहाँ समय की रफ्तार अपने आप धीमी हो जाती है। जैसे-जैसे गाड़ी पहाड़ों की ओर चढ़ती है, वैसे-वैसे हवा ठंडी होती जाती है, मोबाइल नेटवर्क कमजोर होता जाता है और मन हल्का होने लगता है।
हिमाचल में सुबह की शुरुआत देवदार के जंगलों के बीच होती है, दोपहर नदियों के किनारे गुजर जाती है और शामें पहाड़ों के पीछे डूबते सूरज को देखते हुए खुद-ब-खुद शांत हो जाती हैं। यहाँ के छोटे गाँव, पुराने मंदिर, बौद्ध मठ और घुमावदार रास्ते मिलकर एक ऐसी दुनिया बनाते हैं जहाँ हर मोड़ पर कोई नया दृश्य और हर ठहराव पर एक नया एहसास मिलता है।
यह कोई एक तरह की यात्रा नहीं है। कोई यहाँ बर्फ देखने आता है, कोई ट्रेकिंग के लिए, कोई शांति ढूंढने और कोई बस कुछ दिनों के लिए खुद से मिलने। लेकिन हिमाचल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर किसी को वही देता है जिसकी उसे सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है।
हिमाचल सिर्फ पहाड़ों और घाटियों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन मंदिरों और आध्यात्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। अगर आप यात्रा के दौरान इन पवित्र जगहों को भी देखना चाहते हैं, तो आप हमारा हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिर वाला पूरा गाइड भी जरूर देखें।
अगर आप “हिमाचल में घूमने वाली जगहें” ढूंढ रहे हैं, तो यह लेख सिर्फ नामों की सूची नहीं है। यह एक पूरा ट्रैवल गाइड है, जो आपको हिमाचल की उन जगहों से मिलवाएगा जहाँ आज भी सुकून ज़िंदा है, जहाँ रास्ते मंज़िल से ज़्यादा खूबसूरत लगते हैं और जहाँ से लौटते समय आपके बैग में सिर्फ सामान नहीं, बल्कि ढेर सारी यादें होती हैं।
1. मनाली:
मनाली वह जगह है जहाँ पहुँचते ही सबसे पहले हवा बदलती हुई महसूस होती है। यहाँ की ठंडक में एक ताजगी है और आसपास फैले देवदार के जंगलों में एक खास सी खुशबू। ब्यास नदी शहर के किनारे-किनारे बहती रहती है और दूर बर्फ से ढकी चोटियाँ हर समय आपकी नज़र के सामने रहती हैं। सुबह की धूप जब पहाड़ों पर पड़ती है, तो पूरा इलाका हल्का सुनहरा हो जाता है और शाम होते ही ठंड धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी दर्ज करा देती है।
मनाली में एक तरफ सोलंग और अटल टनल जैसी जगहों की हलचल है, तो दूसरी तरफ ओल्ड मनाली के कैफे और गलियाँ हैं जहाँ समय जैसे थम सा जाता है। यह जगह एक साथ रोमांच भी देती है और आराम भी।
यहाँ क्या देखें:
- हिडिंबा देवी मंदिर, जो देवदार के जंगलों के बीच स्थित है
- सोलंग वैली, जहाँ सर्दियों में बर्फ और गर्मियों में एडवेंचर एक्टिविटीज होती हैं
- अटल टनल और उसके पार का लाहौल इलाका
- वशिष्ठ कुंड, जहाँ प्राकृतिक गर्म पानी के कुंड हैं
- ओल्ड मनाली की कैफे वाली गलियाँ
क्या करें:
- सोलंग में स्नो एक्टिविटीज या पैराग्लाइडिंग
- ब्यास नदी के किनारे टहलना
- ओल्ड मनाली में आराम से कैफे होपिंग
- आसपास के गाँव जैसे नग्गर की छोटी ट्रिप
माहौल कैसा है:
- एनर्जेटिक और रिलैक्स्ड का संतुलन
- टूरिस्ट भी हैं और शांत कोने भी
किसके लिए बेस्ट:
-
कपल्स, युवा ट्रैवलर्स, फैमिली और एडवेंचर पसंद करने वाले
कैसे पहुँचें:
- नजदीकी एयरपोर्ट भुंतर (लगभग 50 किमी)
- दिल्ली और चंडीगढ़ से मनाली के लिए सीधी बसें मिलती हैं
- सड़क मार्ग से आने वालों के लिए रास्ता अच्छा है, लेकिन सर्दियों में बर्फ की वजह से समय बढ़ सकता है
घूमने का सही समय:
- अप्रैल से जून घूमने के लिए सबसे अच्छा
- दिसंबर से फरवरी बर्फ देखने के लिए
2. धर्मशाला और मैक्लोडगंज:
धर्मशाला और उसके ऊपर बसा मैक्लोडगंज उन जगहों में से हैं जहाँ पहुँचते ही माहौल बदल जाता है। यहाँ की हवा में एक अजीब सी शांति घुली रहती है। सड़कों के किनारे रंग-बिरंगे प्रेयर फ्लैग लहराते रहते हैं, दूर धौलाधार की बर्फीली चोटियाँ दिखाई देती हैं और हर तरफ एक सुकून भरी धीमी रफ्तार महसूस होती है।
सुबह-सुबह मठों से आती प्रार्थना की आवाज़, छोटे कैफे में बैठकर पहाड़ों को देखते हुए चाय पीना और शाम को हल्की ठंड में टहलना, यह सब मिलकर इस जगह को खास बना देता है। यह कोई भागदौड़ वाली जगह नहीं है। यहाँ लोग अक्सर खुद को थोड़ा धीमा करने आते हैं।
अगर आप यहाँ की यात्रा को सही तरीके से प्लान करना चाहते हैं, तो आप हमारा धर्मशाला और मैक्लोडगंज 3 दिन का यात्रा गाइड भी देख सकते हैं, जिसमें रूट, घूमने की जगहें और पूरा दिन-वार प्लान दिया गया है।

यहाँ क्या देखें:
- नामग्याल मठ और त्सुगलाखांग कॉम्प्लेक्स
- भागसू झरना और भागसू नाग मंदिर
- त्रिउंड ट्रेक, जहाँ से धौलाधार का शानदार नज़ारा दिखता है
- तिब्बती मार्केट और आसपास के कैफे
क्या करें:
- त्रिउंड या आसपास के छोटे ट्रेक
- मठों में शांत समय बिताना
- कैफे में बैठकर किताब पढ़ना या पहाड़ देखना
माहौल कैसा है:
-
शांत, आध्यात्मिक और बहुत ही सुकून भरा
किसके लिए बेस्ट:
-
सोलो ट्रैवलर्स, मानसिक शांति ढूंढने वाले, स्लो ट्रैवल पसंद करने वाले
कैसे पहुँचें:
- नजदीकी एयरपोर्ट गग्गल (कांगड़ा)
- नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट
- पठानकोट या कांगड़ा से टैक्सी या बस से धर्मशाला, फिर मैक्लोडगंज
घूमने का सही समय:
-
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर
3. कसोल:
कसोल पार्वती नदी के किनारे बसा एक छोटा सा गाँव है, लेकिन यहाँ पहुँचते ही ऐसा लगता है जैसे आप किसी और ही दुनिया में आ गए हों। सामने हरे-भरे पहाड़, नीचे बहती ठंडी नदी और आसपास लकड़ी के छोटे-छोटे गेस्टहाउस। यहाँ की सुबह बहुत शांत होती है और शामें बहुत आराम से ढलती हैं।
लोग अक्सर यहाँ कुछ दिनों के लिए आने का प्लान बनाते हैं, लेकिन जगह का माहौल ऐसा है कि रुकने का मन करता चला जाता है। कसोल दिखावे की जगह नहीं है। यह बस बैठकर, देखने और सांस लेने की जगह है।
बहुत से लोग यहाँ नदी के किनारे कैंपिंग करके रात को खुले आसमान के नीचे पहाड़ों की खामोशी और तारों से भरा आसमान देखने का अनुभव भी लेने आते हैं।
कसोल में कैंपिंग का अनुभव वहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती को और भी करीब से महसूस करने का मौका देता है। पार्वती नदी के किनारे या आसपास की पहाड़ियों में लगाए गए कैंप्स में रात बिताना अपने आप में एक अलग ही सुकून देता है। दिन में पहाड़ों और नदी के बीच समय बिताने के बाद, शाम को अलाव के पास बैठना और ऊपर खुले आसमान में तारों को देखना, कसोल की यात्रा को यादगार बना देता है।
कसोल और उसके आसपास कई जगहों पर ऑर्गनाइज़्ड कैंपिंग की सुविधा मिल जाती है, जहाँ टेंट, खाना और बेसिक सुविधाएँ पहले से होती हैं। अगर आप पहली बार कैंपिंग कर रहे हैं, तो ऐसे ही कैंप्स चुनना बेहतर रहता है। ठंड के मौसम में रातें काफी ठंडी हो सकती हैं, इसलिए गर्म कपड़े साथ रखना ज़रूरी है।

यहाँ क्या देखें:
- पार्वती नदी के किनारे वॉक
- मणिकर्ण साहिब, जो पास में स्थित है और अपने गर्म पानी के कुंडों के लिए जाना जाता है
- चालल और तोश जैसे आसपास के गाँव
क्या करें:
- नदी के किनारे समय बिताना
- चालल या खीरगंगा की ओर छोटा ट्रेक
- कैफे में बैठकर आराम करना
माहौल कैसा है:
-
स्लो, शांत और नेचर से जुड़ा हुआ
किसके लिए बेस्ट:
-
सोलो ट्रैवलर्स, कपल्स, बैकपैकर्स और ट्रेकिंग पसंद करने वाले
कैसे पहुँचें:
- नजदीकी एयरपोर्ट भुंतर
- भुंतर से टैक्सी या लोकल बस द्वारा कसोल
घूमने का सही समय:
-
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर
4. स्पीति वैली:
स्पीति वैली हिमाचल की उन जगहों में से है जो पहली नज़र में ही अलग महसूस होती है। यहाँ हरियाली कम है, पेड़ कम हैं, लेकिन खुले आसमान और विशाल पहाड़ों की मौजूदगी हर चीज़ से ज़्यादा गहरी लगती है। रास्ते लंबे हैं, गाँव दूर-दूर बसे हैं और बीच-बीच में पुराने बौद्ध मठ दिखाई देते हैं, जो सदियों से इस सख्त लेकिन खूबसूरत ज़मीन पर टिके हुए हैं।
स्पीति कोई आसान ट्रिप नहीं है। यहाँ आने के लिए तैयारी, समय और धैर्य चाहिए। लेकिन जो लोग यहाँ पहुँचते हैं, वे अक्सर कहते हैं कि यह यात्रा सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि खुद को थोड़ा बेहतर समझने जैसा अनुभव बन जाती है।
यहाँ क्या देखें:
- की मठ, जो एक पहाड़ी पर स्थित है
- काज़ा, जो इस इलाके का मुख्य कस्बा है
- धनकर मठ और धनकर झील
- चंद्रताल झील
- पिन वैली नेशनल पार्क
क्या करें:
- मठों में समय बिताना
- चंद्रताल या आसपास की जगहों तक छोटी यात्राएँ
- पहाड़ों के बीच शांत ड्राइव
माहौल कैसा है:
-
रॉ, शांत, बहुत ही खुला और अलग दुनिया जैसा
किसके लिए बेस्ट:
-
अनुभवी ट्रैवलर्स, फोटोग्राफी पसंद करने वाले, भीड़ से दूर जाने वाले लोग
कैसे पहुँचें:
- दो रास्ते होते हैं: मनाली की तरफ से या शिमला की तरफ से
- आमतौर पर शिमला से किन्नौर होते हुए जाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है
- नजदीकी बड़ा कस्बा काज़ा है
घूमने का सही समय:
- जून से सितंबर
- सर्दियों में रास्ते अक्सर बंद रहते हैं
5. तीर्थन वैली: जहाँ हिमाचल अब भी अपनी असली शक्ल में दिखता है
तीर्थन वैली उन जगहों में से है जहाँ पहुँचकर सबसे पहले यही महसूस होता है कि आप किसी मशहूर टूरिस्ट सर्किट से बहुत दूर आ गए हैं। यहाँ न तो बड़े होटल हैं, न ही शोर-शराबा। चारों तरफ हरे-भरे पहाड़, घने जंगल और बीच से बहती तीर्थन नदी। सुबह-सुबह नदी की आवाज़ और पक्षियों की चहचहाहट के अलावा यहाँ कोई शोर नहीं होता।
यह इलाका ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के पास स्थित है और इसलिए यहाँ की प्रकृति आज भी काफी हद तक वैसी ही है जैसी सदियों पहले रही होगी। यहाँ लोग घूमने कम और कुछ दिनों के लिए धीमी ज़िंदगी जीने ज़्यादा आते हैं।
यहाँ क्या देखें:
- तीर्थन नदी के किनारे के वॉक ट्रेल
- ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के एंट्री पॉइंट्स
- आसपास के छोटे गाँव जैसे गुषैनी और रोल्ला
क्या करें:
- नेचर वॉक और हल्की ट्रेकिंग
- नदी के किनारे बैठकर पढ़ना या बस यूँ ही समय बिताना
- आसपास के गाँवों में लोकल लाइफ देखना
माहौल कैसा है:
-
बहुत शांत, नेचुरल और भीड़ से बिल्कुल दूर
किसके लिए बेस्ट:
-
सोलो ट्रैवलर्स, कपल्स, नेचर लवर्स, डिजिटल डिटॉक्स चाहने वाले
कैसे पहुँचें:
- नजदीकी एयरपोर्ट भुंतर
- भुंतर से औट और फिर तीर्थन वैली तक टैक्सी या बस
- सड़क मार्ग अच्छा है लेकिन आखिरी हिस्सा पहाड़ी और संकरा है
घूमने का सही समय:
-
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर
6. डलहौजी: एक शांत और पुराना पहाड़ी शहर
डलहौजी एक ऐसा हिल स्टेशन है जहाँ आज भी ब्रिटिश समय की झलक मिलती है। यहाँ की सड़कों के किनारे बने पुराने घर, चर्च और देवदार के पेड़ मिलकर एक बहुत ही सधा हुआ और शांत माहौल बनाते हैं। यह कोई बहुत बड़ा या बहुत भीड़ वाला शहर नहीं है। यहाँ की खूबसूरती उसकी सादगी और ठहराव में है।
सुबह की हल्की धूप में पहाड़ों को देखना और शाम को ठंडी हवा में टहलना, डलहौजी की रोज़मर्रा की सबसे अच्छी आदतों में से एक है।
यहाँ क्या देखें:
- सेंट जॉन चर्च
- पंचपुला
- सुभाष बावली
- आसपास का खजियार
क्या करें:
- लंबी सैर और शांति से घूमना
- खजियार की एक दिन की ट्रिप
- लोकल मार्केट में हल्की शॉपिंग
माहौल कैसा है:
-
शांत, क्लासिक और फैमिली फ्रेंडली
किसके लिए बेस्ट:
-
फैमिली, सीनियर सिटीजन, शांत जगह पसंद करने वाले
कैसे पहुँचें:
- नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट
- पठानकोट से टैक्सी या बस द्वारा डलहौजी
घूमने का सही समय:
- मार्च से जून और सितंबर से नवंबर
- सर्दियों में हल्की बर्फबारी भी हो सकती है
7. खजियार: हरे मैदानों और शांत पहाड़ियों के बीच एक खुली दुनिया
खजियार को अक्सर “मिनी स्विट्जरलैंड” कहा जाता है, लेकिन असल में इसकी खूबसूरती किसी तुलना की मोहताज नहीं है। चारों तरफ देवदार के जंगल, बीच में खुला हरा मैदान और पास ही एक छोटी सी झील। यहाँ का नज़ारा ऐसा है कि कुछ देर के लिए बस बैठकर देखते रहने का मन करता है।
डलहौजी से थोड़ी दूरी पर स्थित यह जगह एक परफेक्ट डे ट्रिप भी है और कुछ समय शांति से बिताने की जगह भी।
यहाँ क्या देखें:
- खजियार झील
- आसपास के देवदार के जंगल
- व्यू पॉइंट्स
क्या करें:
- मैदान में टहलना
- फोटोग्राफी
- पास के जंगलों में हल्की वॉक
माहौल कैसा है:
-
खुला, शांत और बहुत सुकून भरा
किसके लिए बेस्ट:
-
फैमिली, कपल्स, फोटोग्राफी पसंद करने वाले
कैसे पहुँचें:
- डलहौजी से टैक्सी द्वारा
- नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट
घूमने का सही समय:
-
मार्च से जून और सितंबर से अक्टूबर
8. बीर और बिलिंग: पहाड़ों के ऊपर उड़ने का अनुभव
बीर और बिलिंग दो अलग-अलग जगहें हैं, लेकिन इन्हें एक साथ ही देखा जाता है। बिलिंग ऊँचाई पर स्थित है और बीर नीचे घाटी में। यही से भारत की सबसे मशहूर पैराग्लाइडिंग फ्लाइट्स होती हैं।
लेकिन बीर सिर्फ एडवेंचर के लिए ही नहीं जाना जाता। यहाँ एक शांत तिब्बती माहौल भी है, छोटे मठ हैं, कैफे हैं और एक बहुत सधी हुई रफ्तार वाली ज़िंदगी है।
यहाँ क्या देखें:
- पैराग्लाइडिंग टेक ऑफ और लैंडिंग साइट
- तिब्बती मठ
- बीर का छोटा बाज़ार
क्या करें:
- पैराग्लाइडिंग
- कैफे में समय बिताना
- आसपास की छोटी सैर
माहौल कैसा है:
-
शांत लेकिन एडवेंचर से भरा हुआ
किसके लिए बेस्ट:
-
एडवेंचर लवर्स, कपल्स, सोलो ट्रैवलर्स
कैसे पहुँचें:
- नजदीकी रेलवे स्टेशन अहजू
- पठानकोट या धर्मशाला से टैक्सी द्वारा
- सड़क मार्ग से अच्छा कनेक्शन
घूमने का सही समय:
-
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर
9. पालमपुर: चाय के बागानों और खुले पहाड़ों की दुनिया
पालमपुर एक बहुत ही सधा हुआ और साफ-सुथरा पहाड़ी शहर है, जो अपने चाय के बागानों और धौलाधार रेंज के खुले नज़ारों के लिए जाना जाता है। यहाँ की हवा में एक ताजगी है और सड़कों के दोनों तरफ फैले चाय के बागान पूरे इलाके को एक अलग पहचान देते हैं।
यह जगह उन लोगों के लिए है जो बिना भीड़ के, आराम से हिमाचल को देखना चाहते हैं।
यहाँ क्या देखें:
- चाय के बागान
- सौरभ वन विहार
- आसपास के छोटे गाँव और व्यू पॉइंट्स
क्या करें:
- चाय बागानों में वॉक
- शांत कैफे में समय बिताना
- पास के मंदिरों और गाँवों की छोटी ट्रिप
माहौल कैसा है:
-
साफ, शांत और बहुत व्यवस्थित
किसके लिए बेस्ट:
-
फैमिली, सीनियर सिटीजन, स्लो ट्रैवल पसंद करने वाले
कैसे पहुँचें:
- नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट या अहजू
- धर्मशाला से टैक्सी या बस
घूमने का सही समय:
-
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर
10. चंबा: जहाँ हिमाचल का इतिहास आज भी ज़िंदा है
चंबा एक ऐसा शहर है जहाँ पहुँचते ही महसूस होता है कि आप सिर्फ किसी पहाड़ी जगह पर नहीं आए, बल्कि एक पुराने और समृद्ध इतिहास वाले इलाके में कदम रख चुके हैं। रावी नदी के किनारे बसा यह शहर अपने मंदिरों, पुराने महलों और पारंपरिक संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहाँ की गलियों में चलते हुए आपको आधुनिक टूरिस्ट टाउन वाली चमक-दमक कम और पुराने समय की ठहराव भरी रफ्तार ज़्यादा महसूस होती है।
चंबा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहाँ हिमाचल का एक अलग, ज्यादा सांस्कृतिक और पारंपरिक रूप देखने को मिलता है, जो बहुत से लोकप्रिय हिल स्टेशनों में अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
यहाँ क्या देखें:
- लक्ष्मी नारायण मंदिर समूह
- चौगान मैदान
- भूरी सिंह संग्रहालय
- रावी नदी के किनारे का इलाका
क्या करें:
- पुराने मंदिरों और ऐतिहासिक इमारतों को देखना
- चौगान में शाम की सैर
- लोकल बाज़ार में पारंपरिक चीज़ें देखना
माहौल कैसा है:
-
सांस्कृतिक, शांत और थोड़ा पुराना हिमाचल वाला
किसके लिए बेस्ट:
-
इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले, शांत जगह पसंद करने वाले
कैसे पहुँचें:
- नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट
- पठानकोट से बस या टैक्सी द्वारा चंबा
- सड़क मार्ग पहाड़ी लेकिन अच्छा है
घूमने का सही समय:
-
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर
11. तोश: पहाड़ों के बीच बसा एक छोटा सा सुकून भरा गाँव
तोश वह जगह है जहाँ पहुँचकर पहली बार यह एहसास होता है कि अब आप सच में पहाड़ों के अंदर आ चुके हैं। पार्वती वैली के आखिरी छोर पर बसा यह छोटा सा गाँव ऊँचे पहाड़ों और खुले आसमान के बीच बहुत ही सादा और शांत जीवन जीता है। यहाँ की सुबहें बहुत शांत होती हैं और शामें जल्दी ढल जाती हैं।
यहाँ कोई बड़ा बाज़ार या घूमने की लिस्ट नहीं है। तोश की खूबसूरती उसकी सादगी, उसकी खामोशी और उसके खुले नज़ारों में है।
यहाँ क्या देखें:
- गाँव से दिखने वाले बर्फीले पहाड़
- आसपास के वॉक ट्रेल्स
- पार्वती वैली के व्यू पॉइंट्स
क्या करें:
- बस बैठकर पहाड़ों को देखना
- छोटे वॉक और आसपास की सैर
- फोटोग्राफी और आराम
माहौल कैसा है:
-
बहुत शांत, स्लो और थोड़ा एकांत भरा
किसके लिए बेस्ट:
-
सोलो ट्रैवलर्स, कपल्स, भीड़ से दूर रहना चाहने वाले
कैसे पहुँचें:
- पहले भुंतर, फिर कसोल और फिर बरशैणी तक
- बरशैणी से पैदल या लोकल टैक्सी से तोश
घूमने का सही समय:
-
अप्रैल से जून और सितंबर से अक्टूबर
12. मलाणा: अपनी अलग दुनिया में बसा एक रहस्यमयी गाँव
मलाणा हिमाचल के सबसे अलग और सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाले गाँवों में से एक है। यह जगह सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि अपनी अलग संस्कृति और नियमों के लिए जानी जाती है। यहाँ के लोग खुद को सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते हैं और गाँव के अपने अलग कानून और परंपराएँ हैं।
यह गाँव पहाड़ों के बीच काफी ऊँचाई पर बसा है और यहाँ पहुँचने का रास्ता भी एक छोटा सा ट्रेक है, जो इसे और खास बना देता है।
यहाँ क्या देखें:
- मलाणा गाँव और उसकी बनावट
- आसपास की घाटियाँ और पहाड़
- गाँव के बाहर से दिखने वाले व्यू
क्या करें:
- गाँव को सम्मान के साथ देखना और समझना
- ट्रेकिंग और फोटोग्राफी
- आसपास के नज़ारों का आनंद लेना
माहौल कैसा है:
-
अलग, थोड़ा रहस्यमयी और बहुत पारंपरिक
किसके लिए बेस्ट:
-
अनुभवी ट्रैवलर्स, संस्कृति में रुचि रखने वाले
कैसे पहुँचें:
- भुंतर या मनाली से पहले नग्गर या जरी
- वहाँ से ट्रेक द्वारा मलाणा
घूमने का सही समय:
-
मई से अक्टूबर
13. कुल्लू: सिर्फ मनाली का रास्ता नहीं, बल्कि एक पूरी घाटी
कुल्लू को अक्सर लोग सिर्फ मनाली के रास्ते में पड़ने वाली जगह समझते हैं, लेकिन असल में यह एक पूरी घाटी है, जिसकी अपनी अलग पहचान और खूबसूरती है। ब्यास नदी के किनारे-किनारे फैला यह इलाका सेब के बागानों, छोटे गाँवों और खुले पहाड़ी नज़ारों से भरा हुआ है।
यहाँ की ज़िंदगी मनाली की तुलना में थोड़ी शांत और ज्यादा स्थानीय लगती है। अगर आप हिमाचल को थोड़ा ज्यादा असली रूप में देखना चाहते हैं, तो कुल्लू घाटी में कुछ समय जरूर बिताना चाहिए।
यहाँ क्या देखें:
- ब्यास नदी के किनारे के इलाके
- नग्गर कैसल
- आसपास के गाँव और सेब के बागान
क्या करें:
- घाटी में ड्राइव
- नग्गर और आसपास की जगहों की सैर
- लोकल जीवन को देखना
माहौल कैसा है:
-
खुला, नेचुरल और लोकल टच वाला
किसके लिए बेस्ट:
-
फैमिली, स्लो ट्रैवलर्स, नेचर लवर्स
कैसे पहुँचें:
- नजदीकी एयरपोर्ट भुंतर
- दिल्ली और चंडीगढ़ से सड़क मार्ग द्वारा
घूमने का सही समय:
-
मार्च से जून और सितंबर से अक्टूबर
14. शिमला:
शिमला सिर्फ हिमाचल की राजधानी नहीं है, यह एक ऐसा शहर है जहाँ चलते हुए आपको कभी लगता है कि आप किसी पुराने अंग्रेज़ी शहर में आ गए हैं, और कभी लगता है कि आप बादलों के बीच टहल रहे हैं। यहाँ की ठंडी हवा, देवदार के लंबे पेड़, पहाड़ियों पर बने पुराने घर और शाम को जलती स्ट्रीट लाइट्स – सब मिलकर एक बहुत ही खास माहौल बनाते हैं।
सुबह जब धूप पहाड़ों पर धीरे-धीरे उतरती है और शाम को रिज पर हल्की ठंड के साथ लोग टहलते हैं — तब शिमला सच में “पहाड़ों की रानी” लगता है।
अगर आप शिमला को विस्तार से एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो हमारा शिमला में घूमने की जगहें वाला पूरा गाइड जरूर देखें, जिसमें देखने वाली सभी प्रमुख जगहों की डिटेल जानकारी दी गई है।
यहाँ क्या देखें:
- मॉल रोड और द रिज
- जाखू हनुमान मंदिर
- क्राइस्ट चर्च
- कुफरी और नारकंडा (आसपास की जगहें)
क्या करें:
- मॉल रोड पर शाम की सैर
- टॉय ट्रेन की यात्रा
- सर्दियों में स्नो वॉक
माहौल कैसा है:
-
क्लासिक, फैमिली-फ्रेंडली, आरामदायक
किसके लिए बेस्ट:
-
फैमिली, कपल्स, पहली बार हिमाचल आने वाले
शिमला कैसे पहुँचें:
- नजदीकी रेलवे स्टेशन: कालका
- कालका से शिमला टॉय ट्रेन या टैक्सी
- चंडीगढ़ और दिल्ली से रेगुलर बसें
- सड़क मार्ग बहुत अच्छा है
घूमने का सही समय:
- मार्च से जून (सुखद मौसम)
- दिसंबर–जनवरी (बर्फ के लिए)
हिमाचल घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
हिमाचल प्रदेश हर मौसम में अलग रूप दिखाता है, लेकिन ट्रैवल के हिसाब से:
- मार्च से जून: सबसे अच्छा समय, मौसम सुहावना
- जुलाई से सितंबर: मानसून, कुछ इलाकों में भूस्खलन का खतरा, मानसून में यात्रा से पहले मौसम की स्थिति भारतीय मौसम विभाग की वेबसाइट पर जरूर चेक करें।
- अक्टूबर और नवंबर: साफ मौसम, कम भीड़
- दिसंबर से फरवरी: बर्फ के लिए, लेकिन कुछ रास्ते बंद हो सकते हैं
हिमाचल ट्रिप प्लान करते समय ध्यान रखने वाली बातें
- हमेशा मौसम और रोड कंडीशन चेक करें
- पहाड़ों में ड्राइव करते समय रात से बचें
- कैश रखें, हर जगह नेटवर्क और UPI नहीं चलता
- स्थानीय संस्कृति और प्रकृति का सम्मान करें
अगर आप हिमाचल पहली बार जा रहे हैं, तो हमारा हिमाचल यात्रा के ज़रूरी टिप्स और सावधानियाँ वाला पूरा गाइड जरूर देखें, जिसमें पैकिंग, सेफ्टी और रोड कंडीशन से जुड़ी सारी जरूरी बातें विस्तार से बताई गई हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या हिमाचल फैमिली ट्रिप के लिए सही है?
हाँ, शिमला, मनाली, डलहौजी, पालमपुर और कुल्लू जैसे स्थान फैमिली के लिए बहुत अच्छे हैं।
क्या हिमाचल सोलो ट्रैवल के लिए सुरक्षित है?
ज़्यादातर टूरिस्ट इलाकों में हाँ, लेकिन बेसिक सावधानियाँ हमेशा रखें।
हिमाचल घूमने के लिए कितने दिन काफी हैं?
कम से कम 7 से 10 दिन, ताकि 2 से 3 जगह आराम से देखी जा सकें।
पहली बार जाने वाले कहाँ जाएँ?
शिमला, मनाली या धर्मशाला से शुरुआत करना सबसे आसान और सुरक्षित रहता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी पहाड़ियों, नदियों या बर्फीली चोटियों में ही नहीं है, बल्कि उस एहसास में है जो यह जगह आपको अपने साथ लेकर लौटने देती है। यहाँ से वापस जाने के बाद भी कुछ न कुछ आपके अंदर रुक जाता है। कभी किसी शांत सुबह की याद, कभी किसी पहाड़ी रास्ते की खामोशी, तो कभी किसी छोटे से गाँव में बिताए गए सादे से दिन की गर्माहट।
आज के समय में, जब हर जगह जल्दी देखने और जल्दी आगे बढ़ने की आदत हो गई है, हिमाचल आपको रुकना सिखाता है। यह आपको सिखाता है कि सफर सिर्फ मंज़िल तक पहुँचना नहीं होता, बल्कि रास्ते को महसूस करना भी उतना ही ज़रूरी होता है।
चाहे आप पहली बार पहाड़ों की ओर जा रहे हों या कई बार लौट चुके हों, हिमाचल हर बार आपको एक नए तरीके से अपनाता है। और शायद यही वजह है कि लोग यहाँ से लौट तो जाते हैं, लेकिन उनका मन अक्सर यहीं कहीं पहाड़ों में छूट जाता है।
अगर आप भी अपनी अगली यात्रा में सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि कुछ महसूस करना चाहते हैं, तो हिमाचल आपकी राह देख रहा है।


